खून में लथपथ सैनिकों से मिलिट्री हॉस्पिटल में मिलती थी, कहते थे हम ठीक हैं, उनकी आंखें सवाल करती थीं, उन्हें हौसला देना बड़ी जिम्मेदारी थी


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